DNA ANALYSIS: true tribute to deathless story of 40 pulwama attack martyrs | DNA ANALYSIS: राष्ट्र के लिए दिखाया ‘सर्वोच्च प्रेम’, 40 शहीदों की ‘अमर प्रेम’ कहानी का विश्लेषण

DNA ANALYSIS: राष्ट्र के लिए दिखाया 'सर्वोच्च प्रेम', 40 शहीदों की 'अमर प्रेम' कहानी का विश्लेषण

आज वैलेंटाइन डे है यानी आज प्रेम प्रकट करने का दिन है लेकिन क्या प्रेम के लिए किसी एक दिन को निर्धारित किया जा सकता है? और क्या प्रेम का सिर्फ एक ही स्वरूप हो सकता है? इसका उत्तर है नहीं. प्रेम सिर्फ वो नहीं होता जो आप दूसरों से करते हैं. प्रेम राष्ट्र से भी किया जा सकता है, समाज से भी किया जा सकता है और प्रकृति से भी किया जा सकता है. आज हम एक-एक करके प्रेम के इन सभी रूपों की व्याख्या करेंगे.  लेकिन सबसे पहले बात राष्ट्र प्रेम की क्योंकि ये प्रेम का सबसे निस्वार्थ और सबसे सर्वोच्च रूप है. 

आज 14 फरवरी है और आज ही लोग वैलेंटाइन डे मनाते हैं लेकिन आज का दिन एक और वजह से अलग है और वो वजह ये है कि पिछले वर्ष आज ही के दिन जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए एक आतंकवादी हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे. इन जवानों ने ये शहादत इसलिए दी थी क्योंकि ये अपने देश से प्रेम करते थे. कहते हैं इश्क में सबसे बड़ी कुर्बानी जीवन की कुर्बानी होती है लेकिन असल जिंदगी में शायद की कोई किसी के प्रेम में अपने जीवन का बलिदान देता हो. देश के सैनिक इस मामले में औरों से अलग होते हैं. वो ना सिर्फ जीवनभर अपने देश को अपना सब कुछ मानते हैं बल्कि समय आने पर देश के लिए जान भी दे देते हैं. 

आज हम वैलेंटाइन डे के मौके पर आपके लिए DNA का प्रेम विशेषांक लेकर आए हैं. लोग पूरे जीवन सच्चे और निस्वार्थ प्रेम को खोजते हैं लेकिन फिर भी ज्यादातर लोगों को ये मिलता नहीं. आज हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि प्रेम नाम की इस भावना को लोग सम भी पाए हैं या नहीं? और कहीं इसका दुरुपयोग तो नहीं हो रहा. प्यार निस्वार्थ रूप से सब कुछ अर्पित करने का नाम है लेकिन लोग अब प्यार के जरिए सब कुछ अर्जित करना चाहते हैं. इसलिए आज प्रेम के सही अर्थ को समझना बहुत जरूरी है. 

आज हम प्रेम के चार अलग अलग रूपों का विश्लेषण करेंगे. पहला है राष्ट्र प्रेम, दूसरा है माता-पिता का प्रेम, तीसरा है साथी से प्रेम और चौथा है प्रकृति से प्रेम. राष्ट्र प्रेम, प्रेम का सबसे सर्वोच्च और निस्वार्थ रूप है इसलिए आज हम सबसे पहले राष्ट्र आज 14 फरवरी है. पुलवामा के शहीदों ने भी देश के लिए ऐसा ही सर्वोच्च बलिदान दिया था. आज पूरा देश पुलवामा के उन शहीदों को याद कर रहा है और हम भी उन वीरों को नमन करते हैं. 

पूरा देश ने दी पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि
आज 14 फरवरी है और आज लोग Valentine’s Day मनाते हैं लेकिन आज का दिन एक और वजह से अलग है और वो वजह ये है कि पिछले वर्ष आज ही के दिन जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए एक आतंकवादी हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे. इन जवानों ने ये शहादत इसलिए दी थी क्योंकि ये अपने देश से प्रेम करते थे. कहते हैं प्यार में सबसे बड़ी कुर्बानी जीवन की कुर्बानी होती है लेकिन असल जिंदगी में शायद ही कोई किसी के प्रेम में अपने जीवन का बलिदान देता हो. लेकिन देश के सैनिक इस मामले में औरों से अलग होते हैं. वो ना सिर्फ जीवनभर अपने देश को अपना सब कुछ मानते हैं बल्कि समय आने पर देश के लिए जान भी दे देते हैं. पुलवामा के शहीदों ने भी देश के लिए ऐसा ही सर्वोच्च बलिदान दिया था. आज पूरा देश पुलवामा के उन शहीदों को याद कर रहा है और हम भी उन वीरों को नमन करते हैं. 

देश के बड़े-बड़े नेता कर रहे शहीदों का अपमान
हमारे देश के कुछ नेता ऐसे भी हैं जो इन जवानों की शहादत को भी शक की नज़र से देखते हैं. पिछले वर्ष जब इन जवानों के पार्थिव शरीर दिल्ली लाए गए थे तब सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी श्रद्धांजलि प्रकट की थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन शहीदों की परिक्रमा की थी और तमाम विरोधी विचारधारा के नेता भी इस मौके पर एकजुट हो गए थे लेकिन ये एकजुटता कुछ ही घंटों तक कायम रही और फिर वोट बैंक की राजनीति करने वाले नेताओं ने पुलवामा हमले पर ही सवाल उठाने शुरू कर दिए. इस दौरान चुनाव बीत गए लेकिन शहादत पर राजनीति का दौर नहीं बीता और आज एक बार फिर देश के बड़े-बड़े नेता शहीदों का अपमान कर रहे हैं. कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने इस मौके पर एक ट्वीट करके सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं. राहुल गांधी ने पूछा है कि इस हमले से किसको फायदा हुआ? हमले को लेकर जो जांच हुई, उसका नतीजा क्या रहा? और बीजेपी की सरकार में जवानों की सुरक्षा में कमी के लिए किसको जिम्मेदार ठहराया गया है? 

राहुल गांधी कांग्रेस के बड़े नेता हैं और विपक्ष में होने के नाते वो सरकार से सवाल भी पूछ सकते हैं लेकिन अपनी राजनीति के लिए वो शहीदों को बीच में क्यों ला रहे हैं? पिछले वर्ष जब दिल्ली में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई थी तब राहुल गांधी भी वहां मौजूद थे. हम आपको वो तस्वीर फिर से दिखाना चाहते हैं. सवाल ये है कि क्या 40 जवानों की मौत से किसी देश को कोई फायदा हो सकता है? इसका जवाब है नहीं. क्योंकि ये किसी भी राष्ट्र को होने वाला सबसे बड़ा नुकसान है. जब भी किसी सैनिक की जान जाती है तो देश को एक बड़ा सदमा लगता है और उस जवान के परिवार को इससे उबरने में तो बरसों लग जाते हैं और कई बार पूरी जिंदगी शहीदों के परिवार इस गम से उबर नहीं पाते. 

इसलिए जब पूरा देश 40 जवानों की शहादत को याद कर रहा हो, उस समय राजनीति के तराजू पर इस शहादत को तोलने का मतलब इन शहीदों के अपमान के अलावा कुछ नहीं हो सकता. अब राहुल गांधी के इस बयान पर राजनीति शुरू हो गई है. यानी पिछले एक साल में पुलवामा की सड़क पर धमाके के बाद हुआ गड्ढा तो भर गया लेकिन राजनेता आज भी उस हमले के जख्मों को लगातार कुरेद रहे हैं और वो भी सिर्फ इसलिए ताकि उनकी डूबती राजनीति किसी तरह किनारे पर आ जाए. लेकिन इन लोगों को ये नहीं भूलना चाहिए कि इनके ऐसे बयानों की वजह से ही देश की जनता चुनाव में इनसे किनारा कर लेती है. 

आज पूरे देश ने पुलवामा हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि दी. पुलवामा हमले की पहली बरसी पर आज CRPF की 185वीं बटालियन कैंप में एक शहीद स्मारक का अनावरण किया गया है. ये स्मारक एक ऐसा तीर्थ स्थान है जहां पर CRPF के उन सभी जवानों के नाम लिखे हुए हैं जिन्होंने एक वर्ष पहले देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी. सवाल ये है कि आपमें से कितने लोग आने वाले समय में इन जवानों को श्रद्धांजलि देने वहां जाएंगे? हमारे देशवासियों की याददाश्त बहुत कमज़ोर है और हम अक्सर ऐसी कुर्बानियों को भुला देते हैं. देश के लोगों को फिल्मी सितारों और क्रिकेटर्स के नाम तो याद रहते हैं. इस हफ्ते कौन सी फिल्म आने वाली ये भी याद रहता है लेकिन उन जवानों में से शायद ही किसी एक का भी नाम याद रहता हो जो देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर देते हैं. हमारे देश में कुछ लोग ऐसे हैं जो शहीदों को सम्मान देना जानते हैं और उन्हें याद रखना भी. महाराष्ट्र के उमेश जाधव भी उन्हीं में से एक हैं. 

महाराष्ट्र के उमेश जाधव ने 40 शहीदों के घरों से जुटाई मिट्टी
उमेश ने एक वर्ष पहले पुलवामा हमले के बाद ये वादा किया था कि वो एक एक शहीद जवान के घर जाएंगे और वहां की मिट्टी लेकर आएंगे. उमेश ने ऐसा ही किया. उन्होंने अपना कामकाज तक छोड़ दिया और एक साल में 60 हज़ार किलोमीटर की यात्रा करके उन्होंने अपना मिशन पूरा किया. 40 शहीदों के घरों से लाई गई मिट्टी को उन्होंने एक कलश में जमा किया और आज पुलवामा में बनाए गए स्मारक को समर्पित कर दिया. 

पिछले एक वर्ष में Zee News भी इस शहादत को कभी भुला नहीं पाया. हमने भी प्रण लिया था कि हम इन शहीदों के परिवारों से बात करेंगे और पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों के दोस्तों से मिलकर ये समझने की कोशिश करेंगे कि जब अपना फर्ज निभाते हुए इन जवानों का सामना फिदायीन आतंकवादियों से होता है, तो क्या होता है. जवानों के साथियों की कहानियां और उनके परिवारों का दर्द आज आपको भी सच्चे राष्ट्र प्रेम से रूबरू कराएगा.  





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